Tuesday, April 9, 2019

राष्टीय शिक्षक शिक्षा परिषद [NCTE]

राष्टीय शिक्षक शिक्षा परिषद 

National Council for Teacher Education (NCTE)

भारत सरकार की एक संस्था है, जिसकी स्थापना राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद अधिनियम, १९९३ (७३, १९९३) के अन्तर्गत १७ अगस्त, १९९५ में की गई थी। इसका उत्तरदायित्व भारतीय शिक्षा प्रणाली के मानक, प्रक्रियाएं एवं धाराओं की स्थापना एवं निरीक्षण करना है।


राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद

स्थापना   -   १७ अगस्त १९९५
अध्यक्ष    -   मो.अख्तर सिद्दीक़ी
स्थान      -    नई दिल्ली
पता        -    हंस भवन, बहादुर शाह ज़फर मार्ग
             
जालस्थल -     www.ncte-india.org/


इतिहास

1973 के पूर्व राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की भूमिका अध्यापक शिक्षा से संबंधित सभी विषयो पर केंद्रीय और राज्य सरकारो के लिए एक सलाहकार निकाय के रूप में थी। परिषद का सचिवालय राष्ट्रीय शेक्षिक अनुशंधान तथा प्रशिक्षण परिषद, (एनसीईआरटी) के अध्यापक शिक्षा विभाग में स्थित था। शैक्षणिक क्षेत्र में अपने प्रशंसनीय कार्य के बाबजूद परिषद, अध्यापक शिक्षा में मानको को बनाये रखने तथा घटिया अध्यापक शिक्षा संस्थानों की बरोतरी को रोकने के अपने अनिवार्ये विनियामक कार्य नहीं कर सकी थी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन॰पी॰ई) 1986 और उसके अधीन कार्य योजना में अध्यापक शिक्षा प्रणाली को सर्वथा दुरुस्त करने के लिए पहले उपाय के रूप में संविधिक दर्जे और अपेक्षित संसाधनों से युक्त राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा प्ररिषद की कल्पना की गई थी। एक साविधिक निकाय के रूप में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा प्ररिषद अधिनियम 1993 के अधीन (1993 का 73 वा) राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा प्ररिषद 17 अगस्त 1995 से अस्तितव में आई।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा प्ररिषद का मूल उद्देश्य समूचे भारत में अध्यापक शिक्षा प्रणाली का नियोजित और समन्वित विकास करना, अध्यापक शिक्षा प्रणाली में मानदंडों और मानको का विनियमन तथा उन्हे समुचित रूप से बनाये रखना और तत्संबंधी विषय हैं।

राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) का मुख्‍य उद्देश्‍य संपूर्ण देश में अध्‍यापक शिक्षा प्रणाली के योजनागत और समन्वित विकास को प्राप्‍त करना और इससे संबंधित मामलों हेतु एवं अध्‍यापक शिक्षा प्रणाली में मानकों और मापदंडों का विनियमन और उचित अनुरक्षण करना है।

संगठनात्मक ढाँचा

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद का मुख्यालय दिल्ली में है तथा भोपाल, भुवनेश्वर, बंगलुरु तथा जयपुर में इसकी क्षेत्रिय समितियाँ हैं।


राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद

राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की स्‍थापना अगस्‍त, 1995 में इस लक्ष्‍य के साथ की गई थी कि पूरे देश में अध्‍यापक शिक्षा प्रणाली का नियोजित एवं समन्‍वित विकास किए जाने के साथ ही जरूरी नियम बनाने और अध्‍यापक शिक्षा के मानकों एवं स्‍तरों का उचित संरक्षण किया जा सके। एनसीटीई के कुछ प्रमुख विभिन्‍न अध्‍यापक शिक्षा कार्यक्रमों के लिए स्‍तरों का निर्धारण करना, अध्‍यापक शिक्षा संस्‍थानों को मान्‍यता प्रदान करना, अध्‍यापकों की नियुक्‍ति के लिए न्‍यूनतम शैक्षणिक योग्‍यताओं हेतु दिशा-निर्देश तैयार करना, सर्वेक्षण और अध्‍ययन करना, अनुसंधान एवं नवीन तरीके अपनाना तथा शिक्षा के व्‍यावसायीकरण पर रोक लगाना इत्‍यादि हैं।

परिषद की चार क्षेत्रीय समितियां जयपुर, बैंगलोर, भुवनेश्‍वर तथा भोपाल में गठित की गई हैं तो क्रमश: उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी एवं पश्‍चिमी क्षेत्र के लिए हैं। ये क्षेत्रीय समितियां अपने-अपने क्षेत्र में अध्‍यापक-शिक्षण संस्‍थानों को मान्‍यता देने के कार्य करती हैं। राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत इन्‍हें अध्‍यापक शिक्षण पाठ्यक्रम चलाने के लिए ऐसी संस्‍थाओं को अनुमति देने का अधिकार है।

एक जनवरी, 2007 तक एनसीटीई ने 9045 पाठ्यक्रमों के माध्‍यम से 7.72 लाख प्रशिक्षु अध्‍यापकों को प्रशिक्षण देने हेतु 7461 अध्‍यापाक प्रशिक्षण संस्‍थानों को मान्‍यता प्रदान की। एनसीटीई ने सी.एड, डी.एड, बी.एड, डीपी.एड और एमपी.एड जैसे विभिन्‍न अध्‍यापक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए नए नियम और मानक जारी किए हैं। नए नियम अध्‍यापक कार्यक्रमों की गुणवत्ता सुधारने और अध्‍यापाक शिक्षण संस्‍थानों में अन्‍य सुविधाओं के अलावा बुनियादी मजबूती के लिए बनाए गए हैं।


राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (संशोधन) अधिनियम, 2017

1 जुलाई, 1995 को अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम, 1993 (NCTE : National Council for Teacher Education Act, 1993) प्रभावी हुआ था। यह अधिनियम जम्मू व कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे देश में लागू है। अधिनियम का मुख्य उद्देश्य एक ‘राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद’ (NCTE) की स्थापना करना था जिससे अध्यापक शिक्षा प्रणाली में नियोजित एवं समन्वयात्मक विकास की प्राप्ति की जा सके और उक्त प्रणाली में मानदंडों एवं मानकों का समुचित अनुरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा उपर्युक्त अधिनियम में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई।

  • 1 नवंबर, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम, 1993’ में संशोधन हेतु संसद में विधेयक पेश किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई।
  • संशोधित अधिनियम ‘राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (संशोधन) अधिनियम, 2017’ होगा।
  • संशोधित अधिनियम में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की अनुमति के बिना अध्यापक शिक्षा पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाले केंद्र/राज्य विश्वविद्यालयों को भूतलक्षी (Retrospective) प्रभाव से मान्यता प्रदान करने का प्रावधान है।
  • संशोधन में एनसीटीई (NCTE) मान्यता (Recognition) के बिना अध्यापक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले केंद्र/राज्य/संघ शासित क्षेत्र के वित्तपोषित संस्थानों/विश्वविद्यालयों को अकादमिक सत्र 2017-18 तक भूतलक्षी प्रभाव से मान्यता प्रदान करने का प्रावधान है।
  • यह भूतलक्षी प्रभाव की मान्यता एकबारगी उपाय के रूप में प्रदान की जा रही है, ताकि इन संस्थानों से उत्तीर्ण हुए पंजीकृत छात्रों के भविष्य को खतरा न हो।
  • उक्त संशोधन से इन संस्थानों/विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे या यहां से पहले ही उत्तीर्ण हो चुके छात्र अध्यापक के रूप में रोजगार पाने के योग्य होंगे।
  • उपरोक्त उल्लिखित लाभों को प्राप्त करने की दृष्टि से मानव संसाधन विकास मंत्रालय के ‘स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग’ द्वारा यह संशोधन प्रस्तावित किया गया है।
  • अध्यापक शिक्षक पाठ्यक्रम, जैसे-बी.एड. (B.Ed) एवं डिप्लोमा इन इलेमेंट्री एजुकेशन (D.El.Ed.), चलाने वाले सभी संस्थानों को एनसीटीई (NCTE) अधिनियम की धारा 14 के अंतर्गत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से अनुमति लेनी होगी।
  • इसके अतिरिक्त ऐसे मान्यता प्राप्त संस्थानों/विश्वविद्यालयों को एनसीटीई अधिनियम की धारा 15 के अंतर्गत पाठ्यक्रमों की अनुमति प्राप्त करनी होगी।


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